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Friday, February 4, 2011

हाँ , सचमुच ! फ़रिश्ता बनना कुछ भी तो मुश्किल नहीं है The angel

ठीक ऐसे ही
जो अपनी माँ को आदर नहीं दे सकता वह मौसी के पैर क्या दबाएगा ?

मेरी ख़्वाहिश है कि मैं फिर से फरिश्ता हो जाऊँ
माँ से इस तरह लिपट जाऊँ कि बच्चा हो जाऊँ

Nice post.

Welcome.

मानवता को बचाइये
लेकिन पहले माँ को बचाइये

हर दिल में इक जज़्बा जगाइये
'प्यारी माँ' को अपनाइये

'प्यारी माँ' केवल एक ब्लाग मात्र नहीं है बल्कि एक अभियान है जिसमें आपके सहयोग की ज़रूरत है । अपनी ईमेल आईडी भेजिए ताकि आप इस रचनात्मक और पवित्र अभियान मेँ एक लेखिका के तौर पर शामिल हो सकें ।
धन्यवाद !

eshvani@gmail.com

मैंने यह कमेँट आज कविता रावत जी के ब्लाग पर दिया है -
http://kavitaravatbpl.blogspot.com